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धर्म / आस्था
जगन्नाथपुरी में नहीं होता है जाति-धर्म, ऊंच-नीच के आधार पर भेद

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रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र, तीनों भाई-बहन स्वयं चलकर भक्तों के बीच आते हैं और समानता व सद्भाव का संदेश देते हैं। तभी तो इनके विग्रहों के हैं विशेष अर्थ…

डिशा के समुद्र तट पर जगन्नाथ मंदिर में बहन सुभद्रा तथा भाई बलभद्र के साथ विराजते हैं विग्रह- रूप में भगवान जगन्नाथ। आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन पूजा-अर्चना के बाद ये तीनों भाई-बहन मंदिर से निकलकर विराट रथों पर सवार होते हैं और जाते हैं आम लोगों के बीच। इसके माध्यम से वे भक्तों को संदेश देते हैं कि ईश्वर की नजर में न तो कोई छोटा है न बड़ा, न कोई अमीर है और न गरीब, उनकी नजर में सभी बराबर हैं। इसलिए वे भी सभी के प्रति एकसमान भाव रखें। जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर और फिर जगन्नाथ मंदिर की यह यात्रा नौ दिनों तक चलती है। इस यात्रा को गुंडीचा महोत्सव भी कहते हैं।