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टेक्नोलॉजी
चीन, भारत और टिम कुक

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आईफोन की उम्मीद से कम बिक्री होने के कारण और खासतौर में चीन में बिक्री में आई गिरावट के कारण एपल ने वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही के रेवेन्यू अनुमान में कटौती की है जो आंकड़ा 84 बिलियन डॉलर का है. हालांकि ये अंदाजा लगाया जा रहा था कि ये आंकड़ा 89 बिलियन डॉलर से 93 बिलियन डॉलर तक हो सकता था. निवेशकों को लिखी चिट्ठी में कुक ने कहा, ” हमने कुछ प्रमुख उभरते बाजारों में चुनौतियों का अनुमान लगाया था, लेकिन हम विशेष रूप से चीन में इस पैमाने पर आर्थिक मंदी का अनुमान नहीं लगा सके.” उन्होंने कहा, “कुछ उभरते बाजारों में जहां चुनौतियों का सामना करना पड़ा. वहीं, मैक्सिको, पोलैंड, मलेशिया और वियतनाम जैसे बाजारों में कंपनी ने रिकार्ड प्रदर्शन किया है. हमारी लाभप्रदता और नकदी की इनकम मजबूत बनी हुई है और हमारा अनुमान है कि अंत तिमाही में हमारे पास करीब 130 अरब डॉलर की नकदी होगी.”

चीन में धीमा हुआ एपल

दरअसल पिछले 16 सालों में ऐसा पहली बार हो रहा है जब एपल को इतना बड़ा धक्का लगा है. कुक के एलान के बाद ये कहा जा सकता है कि चीन की अर्थव्यवस्था के कारण एपल को नुकसान हुआ है.  न्यूयॉर्क टाइम्स के एक रिपोर्ट के अनुसार ये कहा गया है कि, आईफोन एक ऐसा गैजेट है जिसे लोग पसंद करते हैं खरीदते हैं. और अब अगर लोग इस फोन को नहीं खरीद रहें तो इसमें कोई दो राय नहीं कि कंपनी के लिए या काफी मुश्किल वक्त है.

बता दें कि चीन में एपल काफी सफल रहा है. चीन में एपल के कुल 40 लाख स्टोर्स है तो वहीं दुनिया का तीसरा बड़ा मार्केट. वित्तीय साल में कंपनी की सेल ने चीन में कुल 52 बिलियन के आंकड़े को छुआ था. जिसमें ज्यादातर आईफोन थे. हालांकि साल 2018 के दूसरे हाफ में जब चीन की अर्थव्यवस्था धीरे होने लगी तो कुक ने कहा कि, ‘ सरकार ने जीडीपी विकास आंकड़े को जारी किया है जो सितंबर क्वार्टर है. ये आंकड़ा पिछले 25 सालों में सबसे कम है. इसी कारण एपल के रिटेल स्टोर और चैनल पार्टनर्स को चीन में झटका लगा. वहीं कुछ और रिपोर्ट्स की अगर बात करें तो धीमी अर्थव्यवस्था का असर अभी आना बाकी है जो काफी बड़ा होगा.

भारत- एक मौका

एक तरफ कुक जहां आईफोन की सेल को लेकर चीन की धीमी अर्थव्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहें हैं तो वहीं कई एनालिस्ट का मानना है कि एपल भारत में अपने विकास पर जोर लगा सकता है. क्योंकि भारत में पहले ही एक ऐसे स्मार्टफोन ब्रैंड का कब्जा है जो लोगो को कम कीमत पर बेहतरीन फीचर्स वाले फोन दे रहा है. ब्रैंड है शाओमी वहीं दूसरा चीनी ब्रैंड यानी की वनप्लस भी यूजर्स को प्रीमियम स्मार्टफोन के रुप में बेहतरीन डिवाइस दे रहा है. इस तरह से अगर देखा जाए तो एपल को भारत में अपनी सेल बढ़ाने के लिए कुछ अलग करना होगा. ऐसा अलग जो आजतक किसी ने न देखा हो. जैसे 50 हजार रुपये के आईफोन जिसमें वो तमाम फीचर्स हों जो प्रीमियम के मामले में नंबर एक हो. बाकी एपल ब्रैंड अभी भी उतना नीचे नहीं गिरा है जितना लोगों को लग रहा है. इसलिए कंपनी के अपने आप को उठाने के लिए एक अलग रास्ता अपनाना होगा.

बता दें कि एपल का मार्केट शेयर भारतीय स्मार्टफोन बाजार में जनवरी और सितंबर 2018 के बीच सिर्फ 1.2 प्रतिशत रहा जिसमें एपल के पुराने मॉडल यानी की आईफोन SE को लोगों ने ज्यादा खरीदा जिसकी कीमत 16,999 रुपये है. वहीं आईफोन XR जो नए आईफोन में सबसे सस्ता है इसकी कीमत 76,900 रुपये है. क्वार्ट्ज की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अभी भी शाओमी नंबर 1 स्मार्टफोन ब्रैंड है. कंपनी को कुल 896 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है जो बिजिंग आधारित फर्म से तीन गुना ज्यादा है. एपल का रेवेन्यू 13,098 करोड़ था तो वहीं शाओमी का 23000 करोड़ रुपये.

भारत एपल के लिए उन मार्केट में से है जहां स्मार्टफोन सेल हमेशा बढ़ता ही रहता है. भारत में एक तरफ 80 प्रतिशत स्मार्टफोन 200 डॉलर के नीचे हैं लेकिन फिर भी लोग एपल का स्मार्टफोन खरीदते हैं. कई लोग जिन्हें एपल का फोन पसंद आता है तो वहीं कई लोग ऐसे हैं जो इंतजार करते हैं और प्रीमियम स्मार्टफोन जब भी लें तो वो एपल ही हो.

बता दें कि एपल भारत में अपनी सेल बढ़ाने के लिए फॉक्सकॉन और विंस्टॉम के साथ साझेदारी में है जहां भारत में मैनुफैक्चरिंग बेस बनाया जाएगा. इसका मकसद होगा सीधे भारत में भारतीय वर्कर की मदद से फोन के पार्ट्स को मांगा कर यहां एसेंबल करना. जिससे फोन की लागत कम होगी और लोग यहां कम कीमत पर आईफोन खरीद सकते हैं. वहीं भारत में आईफोन प्लांट के आने से कुल 25,000 नौकरियां उत्पन्न करेगा

एपल को मिलेगा चीनी कंपनियों से टक्कर

भारतीय स्मार्टफोन मार्केट दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है जहां कंपनियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी. लेकिन इस बीच भारत में जो दो टॉप स्मार्टफोन कंपनियां है वो चीन की हैं जो वनप्लस और शाओमी है. यानी की एपल को इन दोनों कंपनियों से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है. क्योंकि एक तरफ शाओमी जहां बजट स्मार्टफोन का बॉस है तो वहीं वनप्लस प्रीमियम स्मार्टफोन मार्केट किंग. अब देखना होगा कि एपल इन दोनों के बीच कैसे एंट्री करता है जिससे लोगों की पहली पसंद फिर से आईफोन बन जाए.